This page features a video of the poem “पहली बूँद (Pahali Bumd)”, prescribed under the Karnataka State Syllabus for 6th Standard Hindi Malhar. Along with its summary in three languages and transliterated songs. It serves as a valuable learning resource for students and parents, with each song accompanied by its respective lyrics for easy sing-along. The synchronized lyrics help learners follow and recite the song as it progresses, making memorization and learning by heart easier, more effective, and enjoyable.
Lyrics
Hindi
वह पावस का प्रथम दिवस जब,
पहली बूँद धरा पर आई।
अंकुर फूट पड़ा धरती से,
नव-जीवन की ले अँगड़ाई।
धरती के सूखे अधरों पर,
गिरी बूँद अमृत-सी आकर।
वसुंधरा की रोमावलि-सी,
हरी दूब पुलकी-मुसकाई।
पहली बूँद धरा पर आई।
आसमान में उड़ता सागर,
लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर।
बजा नगाड़े जगा रहे हैं,
बादल धरती की तरुणाई।
पहली बूँद धरा पर आई।
नीले नयनों-सा यह अंबर,
काली पुतली-से ये जलधर।
करुणा-विगलित अश्रु बहाकर,
धरती की चिर-प्यास बुझाई।
बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला
बनने को फिर से ललचाई।
पहली बूँद धरा पर आई।
पहली बूँद धरा पर आई।
अंकुर फूट पड़ा धरती से,
नव-जीवन की ले अँगड़ाई।
धरती के सूखे अधरों पर,
गिरी बूँद अमृत-सी आकर।
वसुंधरा की रोमावलि-सी,
हरी दूब पुलकी-मुसकाई।
पहली बूँद धरा पर आई।
आसमान में उड़ता सागर,
लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर।
बजा नगाड़े जगा रहे हैं,
बादल धरती की तरुणाई।
पहली बूँद धरा पर आई।
नीले नयनों-सा यह अंबर,
काली पुतली-से ये जलधर।
करुणा-विगलित अश्रु बहाकर,
धरती की चिर-प्यास बुझाई।
बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला
बनने को फिर से ललचाई।
पहली बूँद धरा पर आई।
Summary
यह कविता वर्षा ऋतु की पहली बूंद और उससे धरती में आने वाले नए जीवन का उत्सव मनाती
है। पहली बूंद को सूखी धरती के होंठों पर गिरने वाले अमृत के समान बताया गया है। अंकुर,
हरी घास, बादल, बिजली और वर्षा प्रकृति के जागने का चित्र बनाते हैं। बारिश को धरती
की लंबे समय से बुझती प्यास शांत करने वाली करुणामयी शक्ति के रूप में दिखाया गया है।
कविता सूखे मौसम के बाद आने वाली हरियाली, ताजगी और नए जीवन के आनंद को व्यक्त करती
है।
है। पहली बूंद को सूखी धरती के होंठों पर गिरने वाले अमृत के समान बताया गया है। अंकुर,
हरी घास, बादल, बिजली और वर्षा प्रकृति के जागने का चित्र बनाते हैं। बारिश को धरती
की लंबे समय से बुझती प्यास शांत करने वाली करुणामयी शक्ति के रूप में दिखाया गया है।
कविता सूखे मौसम के बाद आने वाली हरियाली, ताजगी और नए जीवन के आनंद को व्यक्त करती
है।
Author
गोपालकृष्ण कौल