सुनो भई गप्प

This page features a video of the poem “सुनो भई गप्प (Suno Bhai Gapp)”, prescribed under the Karnataka State Syllabus for 3rd Standard Hindi Veena. Along with its summary in three languages and transliterated songs. It serves as a valuable learning resource for students and parents, with each song accompanied by its respective lyrics for easy sing-along. The synchronized lyrics help learners follow and recite the song as it progresses, making memorization and learning by heart easier, more effective, and enjoyable.
Lyrics Hindi
सुनो भई गप्प, सुनो भई शप्प,
नाव में नदिया डूबी जाए।

चींटी चली बजार को,
नौ मन मल के तेल,
ईंटें दो बगल में ले लीं,
सिर पर धर ली रेल।

सुनो भई गप्प, सुनो भई शप्प,
नाव में नदिया डूबी जाए।

गधा चढ़ा खजूर पर,
खाने को अंगूर,
पीठ पे उसके नाच रहे थे,
पाँच-पाँच लंगूर।

सुनो भई गप्प, सुनो भई शप्प,
नाव में नदिया डूबी जाए।

हाथी ढम-ढम ढोल बजाए,
ऊँट खाट पर सोए,
बिल्ली सबकी रोटी सेके,
घोड़ा कपड़े धोए।

सुनो भई गप्प, सुनो भई शप्प,
नाव में नदिया डूबी जाए।
Summary
यह एक मनोरंजक हास्य गीत है जिसमें असंभव और मजेदार घटनाओं की कल्पना की गई है। इसमें नदी का नाव में डूबना, चींटी का तेल और ईंटें उठाना जैसी विचित्र बातें बताई गई हैं। गधा खजूर के पेड़ पर चढ़कर अंगूर खाता है और उसकी पीठ पर बंदर नाचते हैं। हाथी ढोल बजाता है, ऊँट खाट पर सोता है, बिल्ली रोटी सेंकती है और घोड़ा कपड़े धोता है। ऐसी मजेदार कल्पनाएँ बच्चों को हँसाती हैं और उनकी कल्पनाशक्ति को आनंद देती हैं।
Author
कवि: अज्ञात