This page features a video of the poem “बढ़े चलो, बढ़े चलो (Barhe Chalo, Barhe Chalo)”, prescribed under the Karnataka State Syllabus for 4th Standard Hindi First Language. Along with its summary in three languages and transliterated songs. It serves as a valuable learning resource for students and parents, with each song accompanied by its respective lyrics for easy sing-along. The synchronized lyrics help learners follow and recite the song as it progresses, making memorization and learning by heart easier, more effective, and enjoyable.
Lyrics
Hindi
हाथ एक शस्त्र हो,
न हाथ एक अस्त्र हो,
न अन्न और वस्त्र हो,
हटो नहीं, डरो नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
रहे समक्ष हिमशिखर,
तुम्हारा प्रण उठे निखर,
भले ही जाए जन बिखर,
रुको नहीं, झुको नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
घटा घिरी अटूट हो,
अधर में कालकूट हो,
वही सुधा का घूँट हो,
जिये चलो, मरे चलो, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
गगन उगलता आग हो,
छिड़ा मरण का राग हो,
लहू का अपने फाग हो,
अड़ो नहीं, गड़ो नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
चलो नई मिसाल हो,
जलो नई मिसाल हो,
बढ़ो नया कमाल हो,
झुको नहीं, रुको नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
अशेष रक्त तोल दो,
स्वतंत्रता का मोल दो,
कड़ी युगों की खोल दो,
डरो नहीं, मरो नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
न हाथ एक अस्त्र हो,
न अन्न और वस्त्र हो,
हटो नहीं, डरो नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
रहे समक्ष हिमशिखर,
तुम्हारा प्रण उठे निखर,
भले ही जाए जन बिखर,
रुको नहीं, झुको नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
घटा घिरी अटूट हो,
अधर में कालकूट हो,
वही सुधा का घूँट हो,
जिये चलो, मरे चलो, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
गगन उगलता आग हो,
छिड़ा मरण का राग हो,
लहू का अपने फाग हो,
अड़ो नहीं, गड़ो नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
चलो नई मिसाल हो,
जलो नई मिसाल हो,
बढ़ो नया कमाल हो,
झुको नहीं, रुको नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
अशेष रक्त तोल दो,
स्वतंत्रता का मोल दो,
कड़ी युगों की खोल दो,
डरो नहीं, मरो नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।
Summary
यह गीत साहस, दृढ़ संकल्प और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की भावना को प्रेरित करता है। इसमें कहा गया है कि कठिनाइयों, खतरों या साधनों की कमी के बावजूद पीछे नहीं हटना चाहिए। सामने बड़ी बाधाएँ हों तब भी अपने प्रण को मजबूत करके आगे बढ़ते रहना चाहिए। गीत मृत्यु के भय को दूर करके नए आदर्श स्थापित करने और स्वतंत्रता का मूल्य समझने का संदेश देता है। इसका मुख्य भाव साहस, त्याग और दृढ़ निश्चय के साथ लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहना है।
Author
सोहनलाल द्विवेदी