This page features a video of the poem “तरबूजों का मौसम (Tarabujon Ka Mausam)”, prescribed under the Karnataka State Syllabus for 4th Standard Hindi First Language. Along with its summary in three languages and transliterated songs. It serves as a valuable learning resource for students and parents, with each song accompanied by its respective lyrics for easy sing-along. The synchronized lyrics help learners follow and recite the song as it progresses, making memorization and learning by heart easier, more effective, and enjoyable.
Lyrics
Hindi
गरमी के दिन धमा चौकड़ी
मस्ती हल्ला तुम-हम
आया फिर इस साल लौटकर
तरबूजों का मौसम।
दिन भर खेल-खेल कर थकते
रात गये सुस्ताते
लंबे-लंबे दिन होते और
छोटी-छोटी रातें।
पढ़ने से फिर लंबी फुरसत
खरबूजों का मौसम
आया फिर इस साल लौटकर
तरबूजों का मौसम।
छोटे, काटो मिलकर बाँटो
ठंडे-ठंडे खीरे
रंग-बिरंगे शरबत मीठे
पीते धीरे-धीरे
चना चबेना लइया सत्तू
भड़भूजों का मौसम
आया फिर इस साल लौटकर
तरबूजों का मौसम।
मस्ती हल्ला तुम-हम
आया फिर इस साल लौटकर
तरबूजों का मौसम।
दिन भर खेल-खेल कर थकते
रात गये सुस्ताते
लंबे-लंबे दिन होते और
छोटी-छोटी रातें।
पढ़ने से फिर लंबी फुरसत
खरबूजों का मौसम
आया फिर इस साल लौटकर
तरबूजों का मौसम।
छोटे, काटो मिलकर बाँटो
ठंडे-ठंडे खीरे
रंग-बिरंगे शरबत मीठे
पीते धीरे-धीरे
चना चबेना लइया सत्तू
भड़भूजों का मौसम
आया फिर इस साल लौटकर
तरबूजों का मौसम।
Summary
यह गीत गर्मी के दिनों की मस्ती और आनंद का चित्र प्रस्तुत करता है। बच्चे दिनभर खेलते हैं, थककर रात में आराम करते हैं और लंबे दिनों का आनंद लेते हैं। तरबूज और खरबूजे का मौसम फिर लौट आने पर खुशी व्यक्त की गई है। ठंडे खीरे, रंग-बिरंगे मीठे शरबत, चना, चबेना, लइया और सत्तू जैसे गर्मी के स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों का उल्लेख है। गीत गर्मी की छुट्टियों को खेल, स्वादिष्ट भोजन और मिल-बाँटकर खाने के आनंद से जोड़ता है।
Author
पूर्णिमा वर्मन