मानिनी यशोधरा

This page features a video of the poem “मानिनी यशोधरा (Manini Yashodhara)”, prescribed under the Karnataka State Syllabus for 6th Standard Hindi First Language. Along with its summary in three languages and transliterated songs. It serves as a valuable learning resource for students and parents, with each song accompanied by its respective lyrics for easy sing-along. The synchronized lyrics help learners follow and recite the song as it progresses, making memorization and learning by heart easier, more effective, and enjoyable.
Lyrics Hindi
रे मन, आज परीक्षा तेरी।
विनती करती हूँ मैं तुझसे, बात न बिगड़े मेरी।

अब तक जो तेरा निग्रह था,
बस अभाव के कारण वह था।
लोभ न था, जब लाभ न यह था;

सुन अब स्वागत-भेरी।
रे मन, आज परीक्षा तेरी।।

दो पग आगे ही यह धन है,
अवलंबित जिस पर जीवन है।
पर क्या पथ पाता यह जन है?

मैं हूँ और अँधेरी
रे मन, आज परीक्षा तेरी।।

यदि वे चल आए हैं इतना,
तो दो पद उनको है कितना?
क्या भारी वह, मुझको जितना?

पीठ उन्होंने फेरी।
रे मन, आज परीक्षा तेरी।।

सब अपना सौभाग्य मनाएँ,
दरस-परस, नि:श्रेयस पाएँ।
उद्धारक चाहे तो आएँ,

यही रहे यह चेरी।
रे मन, आज परीक्षा तेरी।।
Summary
यह कविता मन के भीतर चल रहे नैतिक संघर्ष को एक परीक्षा के रूप में प्रस्तुत करती है।
अभाव के कारण बने संयम के बाद धन और अवसर सामने आने पर लोभ जाग सकता है। कविता मन
से आग्रह करती है कि प्रलोभन के समय सही मार्ग चुना जाए। इसमें लोगों के मुँह मोड़ लेने और
कृपा तथा मुक्ति की आशा का भी संकेत है। इसका मुख्य संदेश है कि सच्चे आत्मसंयम की परीक्षा
प्रलोभन और अवसर के समय होती है।
Author
कवि: मैथिलीशरण गुप्त