This page features a video of the poem “गोलगप्पा (Golagappa)”, prescribed under the Karnataka State Syllabus for 4th Standard Hindi Veena. Along with its summary in three languages and transliterated songs. It serves as a valuable learning resource for students and parents, with each song accompanied by its respective lyrics for easy sing-along. The synchronized lyrics help learners follow and recite the song as it progresses, making memorization and learning by heart easier, more effective, and enjoyable.
Lyrics
Hindi
भरा मटर से एक बताशा,
मुँह में फूटे फक्क।
खट्टा, तीखा और चटपटा,
पानी निकले भक्क।
कोई इसको पिचकू बोले,
कोई गोलगप्पा।
दादा-दादी खाएँ मजे से,
खाएँ अम्मा-बप्पा।
मुँह फैलाओ खूब बड़ा-सा ,
झटपट अंदर रक्खो।
बड़ी सावधानी से इसका,
स्वाद निराला चक्खो।
चूक गए थोड़ा-सा भी यदि,
बिगड़ गया जो ढंग।
खाँस-खाँस कर हाल बुरा हो,
कपड़े हों बदरंग।
मुँह में फूटे फक्क।
खट्टा, तीखा और चटपटा,
पानी निकले भक्क।
कोई इसको पिचकू बोले,
कोई गोलगप्पा।
दादा-दादी खाएँ मजे से,
खाएँ अम्मा-बप्पा।
मुँह फैलाओ खूब बड़ा-सा ,
झटपट अंदर रक्खो।
बड़ी सावधानी से इसका,
स्वाद निराला चक्खो।
चूक गए थोड़ा-सा भी यदि,
बिगड़ गया जो ढंग।
खाँस-खाँस कर हाल बुरा हो,
कपड़े हों बदरंग।
Summary
यह गीत मटर से भरे गोलगप्पे को खाने के आनंद और उसके चटपटे स्वाद का मजेदार वर्णन करता है। गोलगप्पा खट्टा, तीखा और चटपटा होता है और मुँह में स्वाद का आनंद देता है। इसे अलग-अलग जगहों पर पिचकू या गोलगप्पा कहा जाता है। दादा-दादी और अम्मा-बप्पा भी इसे मजे से खाते हैं। लेकिन सावधानी से न खाने पर खाँसी आ सकती है और कपड़े भी गंदे हो सकते हैं, ऐसा हास्यपूर्ण ढंग से बताया गया है।
Author
लायक राम मानव