This page features a video of the poem “सुन, इमली के दाने सुन (Sun, Imali Ke Dane Sun)”, prescribed under the Karnataka State Syllabus for 4th Standard Hindi Veena. Along with its summary in three languages and transliterated songs. It serves as a valuable learning resource for students and parents, with each song accompanied by its respective lyrics for easy sing-along. The synchronized lyrics help learners follow and recite the song as it progresses, making memorization and learning by heart easier, more effective, and enjoyable.
Lyrics
Hindi
सुन, इमली के दाने सुन !
सुन, इमली के दाने सुन !
तुझे गली में पाया था,
झुककर तुझे उठाया था,
सोचा, तुझे उठा करके,
मिट्टी तले दबा करके,
चुपके से रख छोड़ूँगा,
कुछ दिन यूँ ही देखूँगा।
फिर जब बारिश आएगी,
मिट्टी नम हो जाएगी,
अंकुर बन तू फूटेगा,
खुली हवा में झूमेगा,
फिर पौधा बन जाएगा,
दिन दूना बढ़ जाएगा,
फिर तुझ पर फल आएँगे,
हम भी इमली खाएँगे।
पर बचकर तू निकल गया,
हाथों से तू फिसल गया,
जब तक मेरी मति जागी,
तुझे गिलहरी ले भागी।
सुन, इमली के दाने सुन !
तुझे गली में पाया था,
झुककर तुझे उठाया था,
सोचा, तुझे उठा करके,
मिट्टी तले दबा करके,
चुपके से रख छोड़ूँगा,
कुछ दिन यूँ ही देखूँगा।
फिर जब बारिश आएगी,
मिट्टी नम हो जाएगी,
अंकुर बन तू फूटेगा,
खुली हवा में झूमेगा,
फिर पौधा बन जाएगा,
दिन दूना बढ़ जाएगा,
फिर तुझ पर फल आएँगे,
हम भी इमली खाएँगे।
पर बचकर तू निकल गया,
हाथों से तू फिसल गया,
जब तक मेरी मति जागी,
तुझे गिलहरी ले भागी।
Summary
इस गीत में एक बच्चे की इमली के बीज को मिट्टी में बोकर पौधा बनाने की कल्पना दिखाई गई है। बच्चा सोचता है कि वर्षा आने पर मिट्टी गीली होगी और बीज अंकुरित होकर पौधा बन जाएगा। आगे चलकर उस पर फल आएँगे और वे इमली खाएँगे। लेकिन बीज हाथ से फिसल जाता है और गिलहरी उसे लेकर भाग जाती है। गीत बच्चे की कल्पना और प्रकृति के एक छोटे से प्रसंग को मजेदार ढंग से प्रस्तुत करता है।
Author
रमेश तैलंग