हम सब सुमन एक उपवन के

This page features a video of the poem “हम सब सुमन एक उपवन के (Ham Sab Suman Ek Upavan Ke)”, prescribed under the Karnataka State Syllabus for 4th Standard Hindi Veena. Along with its summary in three languages and transliterated songs. It serves as a valuable learning resource for students and parents, with each song accompanied by its respective lyrics for easy sing-along. The synchronized lyrics help learners follow and recite the song as it progresses, making memorization and learning by heart easier, more effective, and enjoyable.
Lyrics Hindi
हम सब सुमन एक उपवन के।
एक हमारी धरती सबकी,
जिसकी मिट्टी में जन्मे हम,
मिली एक ही धूप हमें है,
सींचे गए एक जल से हम।
पले हुए हैं झूल-झूलकर
पलनों में हम एक पवन के।

सूरज एक हमारा, जिसकी
किरणें उर की कली खिलातीं,
एक हमारा चाँद, चाँदनी
जिसकी हम सबको नहलाती।
मिले एक-से स्वर हमको हैं
भ्रमरों के मीठे गुंजन के।

रंग-रंग के रूप हमारे,
अलग-अलग है क्यारी-क्यारी,
लेकिन हम सबसे मिलकर ही
है उपवन की शोभा सारी।
एक हमारा माली, हम सब
रहते नीचे एक गगन के।

काँटों में खिलकर हम सबने
हँस-हँसकर है जीना सीखा,
एक सूत्र में बँधकर हमने
हार गले का बनना सीखा।
सबके लिए सुगंध हमारी,
हम श्रृंगार धनी-निर्धन के।
Summary
यह गीत सभी लोगों को एक उपवन के फूलों की तरह मिल-जुलकर रहने का संदेश देता है। सबको एक ही धरती, सूर्य, चाँद और हवा मिलती है। फूलों के रंग और रूप अलग-अलग होते हुए भी उनका मिलन ही उपवन की शोभा बढ़ाता है। फूल काँटों के बीच खिलकर हँसते हुए जीना और एक सूत्र में बँधना सीखते हैं। गीत एकता, सहयोग और सबके लिए सुख-सुगंध फैलाने का संदेश देता है।
Author
कवि: द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी